शिवलिंग का प्रसाद क्यों नहीं खाते? जानें प्राचीन मान्यताएं और शास्त्र

ज्योतिष
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News18•05-02-2026, 16:10
शिवलिंग का प्रसाद क्यों नहीं खाते? जानें प्राचीन मान्यताएं और शास्त्र
- •अन्य देवी-देवताओं के प्रसाद के विपरीत, शिवलिंग पर सीधे चढ़ाए गए प्रसाद को भक्त पारंपरिक रूप से ग्रहण नहीं करते हैं.
- •एक मान्यता यह है कि शिवलिंग, जो शिव की अपार शक्ति का प्रतीक है, चढ़ावे को इतनी तीव्र ऊर्जा से भर देता है जिसे सामान्य लोग सहन नहीं कर सकते.
- •माना जाता है कि चंडेश्वर, शिव के एक गण, का शिव को चढ़ाए गए सभी प्रसाद (निर्मल्य) पर पूर्ण अधिकार है, इसलिए मनुष्यों द्वारा इसे ग्रहण करना चोरी के समान है.
- •शिवलिंग पर चढ़ावा पूर्ण त्याग का प्रतीक माना जाता है, जो वैराग्य और समर्पण को दर्शाता है, जिसमें भक्त का उस वस्तु पर कोई अधिकार नहीं रहता.
- •समुद्र मंथन के दौरान शिव द्वारा हलाहल विष पीने की कहानी बताती है कि विष का कुछ अवशिष्ट प्रभाव बना रहता है, जिससे शिवलिंग का प्रसाद संभावित रूप से हानिकारक हो सकता है.
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