पूर्णचंद्र सिंह का कहना है कि पपीते की खेती में सबसे ज्यादा जरूरी धैर्य और सतर्कता है. यह फसल रोगों के प्रति संवेदनशील होती है, इसलिए समय पर सिंचाई, खाद, कीटनाशक और पौधा संरक्षण पर विशेष ध्यान देना पड़ता है. उन्होंने बताया कि नियमित निगरानी और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है.
मुजफ्फरपुर
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News1827-12-2025, 19:46

कोरोना में बंद हुआ कारोबार, संजय ने पपीते की खेती से कमाए लाखों.

  • COVID-19 महामारी के दौरान संजय का कारोबार ठप हो गया, जिसके बाद उन्होंने आधुनिक कृषि की ओर रुख किया.
  • उन्होंने सरकारी अनुदान का लाभ उठाकर दो एकड़ में Red Lady 786 और एक इटालियन किस्म के पपीते की खेती शुरू की.
  • दो एकड़ में खेती की शुरुआती लागत लगभग तीन लाख रुपये आई, जिससे दो साल में 24 लाख रुपये तक की आय संभव है.
  • पूर्णचंद्र सिंह के अनुसार, पपीते की खेती में धैर्य, सतर्कता, समय पर सिंचाई, खाद और कीट नियंत्रण महत्वपूर्ण हैं.
  • संजय अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और अन्य किसानों को आधुनिक कृषि अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: संजय ने कोरोना संकट को अवसर में बदला, पपीते की खेती से लाखों कमाकर आत्मनिर्भर बने.

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