इसी आवाज ने उसके अंदर भी एक जुनून भर दिया. फिर इस कला को सीखना शुरू कर दिया. 15 साल पहले मजदूरी छोड़ कर इडली बनाना सीखने लगा. पटना में कुछ लोगों से इडली, चटनी और सांभर बनाना सीख लिया. इस प्रकार से उनका सफर एक अलग चैप्टर के साथ शुरू हुआ.
जहानाबाद
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News1803-02-2026, 13:35

जवाहर की प्रेरणादायक कहानी: 70 रुपये की दिहाड़ी से 1000 रुपये के इडली विक्रेता तक का सफर

  • जहानाबाद के जवाहर ने 70 रुपये की दिहाड़ी मजदूर से प्रतिदिन 1000 रुपये से अधिक कमाने वाले इडली विक्रेता तक का सफर तय किया है.
  • उन्होंने पटना में 15 साल तक इडली, चटनी और सांभर बनाना सीखा, फिर अपना व्यवसाय शुरू किया.
  • 12 साल पहले वे जहानाबाद आए, एक मोबाइल इडली की दुकान स्थापित की और जल्द ही लोकप्रिय हो गए.
  • उनकी इडली के लिए घर पर तैयार किया गया अनोखा मसाला मिश्रण उच्च मांग सुनिश्चित करता है, जिससे प्रतिदिन 5 घंटे में लगभग 1000 इडली बिक जाती हैं.
  • जवाहर की लगन और कड़ी मेहनत ने उनकी इडली की दुकान को जहानाबाद शहर में एक प्रसिद्ध नाम बना दिया है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण होता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जवाहर की गरीबी से सफल उद्यमिता तक की यात्रा कड़ी मेहनत और अनुकूलन की शक्ति को दर्शाती है.

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