2016 में वह नौकरी छोड़कर अपने शहर लौट आए. उसके बाद उन्होंने यूपीएसी की तैयारी शुरू की. परीक्षा दिया अच्छे अंक नहीं आए, तो लगा ये बस की बात नहीं है. फिर इसको छोड़ दिया. हालांकि इसके बाद उनके घर के हालत काफी बिगड़ गया था. जयकांत ने बताया कि समय ऐसे ही गुजरता गया. रोज शाम को वह गंगा किनारे बैठते थे. वहां पड़े कचड़े को देखता था.
भागलपुर
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News1806-01-2026, 20:21

मर्चेंट नेवी छोड़ कचरे से बनाई 6 करोड़ की कंपनी, भागलपुर के जयकांत की प्रेरणादायक कहानी.

  • भागलपुर के जयकांत ने ₹1 लाख मासिक वेतन वाली मर्चेंट नेवी की नौकरी (2012-2016) जुनून की कमी के कारण छोड़ी.
  • UPSC में असफलता और आर्थिक तंगी के बाद, गंगा किनारे कचरे से चप्पल बनाने का विचार आया.
  • कम पूंजी से शुरू कर, उन्होंने चप्पलें असेंबल कर ऑटो-रिक्शा से गांवों में बेचना शुरू किया.
  • सरकारी मदद मिलने के बाद, उन्होंने कचरे से चप्पल का कच्चा माल बनाना शुरू किया और अपनी फैक्ट्री स्थापित की.
  • आज उनकी कंपनी का वार्षिक टर्नओवर ₹6 करोड़ है, जो बिहार सहित कई राज्यों में चप्पलें भेजती है, लक्ष्य ₹12 करोड़ है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: जयकांत ने कचरे को ₹6 करोड़ के चप्पल साम्राज्य में बदला, जुनून और दृढ़ता की शक्ति दिखाई.

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