बिहार में देसी मुर्गी पालन का सफल मॉडल: कम बीमारी, ज्यादा दाम, दोगुनी कमाई.

सफलता की कहानी
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News18•17-02-2026, 23:23
बिहार में देसी मुर्गी पालन का सफल मॉडल: कम बीमारी, ज्यादा दाम, दोगुनी कमाई.
- •मंझि ब्लॉक के मोहम्मद इशाक अंसारी ने सफेद फार्म मुर्गियों से देसी नस्लों में सफलतापूर्वक बदलाव किया है.
- •वह अब सोनाली और एफएफजी-2 देसी मुर्गियां पालते हैं, जिनमें बीमारी कम होती है और चारे का खर्च भी कम आता है.
- •देसी मुर्गियां खुले खेतों में अपना चारा खुद ढूंढती हैं, जिससे चारे और दवाइयों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है.
- •सोनाली मुर्गियां अधिक अंडे देती हैं और चूजे भी पालती हैं, जबकि एफएफजी-2 मुर्गियां 3 महीने में 3 किलो से अधिक वजन प्राप्त करती हैं.
- •यह मॉडल किसानों को अंडे, चूजे और मुर्गियां प्रीमियम कीमतों पर बेचकर अधिक आय अर्जित करने में मदद करता है.
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