गणतंत्र दिवस परेड के दौरान जब पूरा देश सैनिकों की टुकड़ियों और झांकियों को देख रहा था, तभी कैमरों में एक युवा अधिकारी बार-बार नजर आए. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिल्कुल पास खड़े थे, बेहद शांत अंदाज में बात कर रहा थे और विदेशी मेहमान 'उर्सुला वॉन डेर लेयेन' को हर बात साफ-साफ समझा रहे थे. उन्हें लगातार टीवी पर देखने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल पूछना शुरू किया कि आखिर ये अधिकारी कौन हैं? उनका आत्मविश्वास और सादगी लोगों का ध्यान खींच रही थी. आपकी जानकारी के लिए बता हैं कि यह अधिकारी हैं सिद्धार्थ बाबू, जो भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अफसर.
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News1801-02-2026, 11:17

IFS अधिकारी सिद्धार्थ बाबू: इंजीनियरिंग से कूटनीति तक, पीएम मोदी के गणतंत्र दिवस दुभाषिया

  • यूपीएससी 2016 में AIR 15 हासिल करने वाले IFS अधिकारी सिद्धार्थ बाबू गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन के लिए दुभाषिया के रूप में दिखे.
  • मूल रूप से कोच्चि, केरल के मैकेनिकल इंजीनियर, उन्होंने सिविल सेवा में आने से पहले ई-कॉमर्स में काम किया था.
  • विदेश नीति और वैश्विक राजनीति से प्रेरित होकर, उन्होंने उच्च रैंक (AIR 15) हासिल करने के बावजूद IAS के बजाय IFS को चुना.
  • उन्होंने मिडिलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में प्रशिक्षण लिया और अपनी भूमिका के लिए कई भाषाओं में कुशल हैं.
  • वर्तमान में विदेश मंत्रालय में उप सचिव (यूरोप और अमेरिका प्रभाग), उनकी कहानी जिज्ञासा, धैर्य और रणनीतिक विकल्पों को उजागर करती है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: सिद्धार्थ बाबू का इंजीनियरिंग से प्रमुख राजनयिक भूमिका तक का सफर जुनून और रणनीतिक करियर विकल्पों का उदाहरण है.

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