मकर संक्रांति को शाम 5 बजे के आसपास जब सूरज ढलने की स्थिति में होता है, तब सूर्य की किरणें पहले मंदिर के बाहर लगे स्तंभों से टकराकर मंदिर के अंदर प्रवेश करती हैं और फिर नंदी महाराज के सींग को छूते हुए सीधे गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग को छूती हैं. यह नजारा साल में एक बार ही देखने को मिलता है, जब बाहर का प्रकाश मंदिर में इस तरीके से पहुंचता है. माना जाता है कि अपनी दिशा बदलने के साथ सूर्य भगवान महादेव का राजतिलक कर आशीर्वाद लेने आते हैं.
धर्म
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News1810-01-2026, 11:28

मकर संक्रांति पर शिवजी के इस मंदिर में सूर्यदेव खुद करते हैं राजतिलक

  • बेंगलुरु के गवि गंगाधरेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति पर सूर्यदेव स्वयं शिवलिंग का राजतिलक करते हैं.
  • यह अद्भुत नजारा साल में एक बार शाम करीब 5 बजे होता है, जब सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग को स्पर्श करती हैं.
  • गविपुरम, बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित यह महादेव मंदिर तीन हजार साल पुराना माना जाता है.
  • मंदिर में चढ़ाए गए दूध को इकट्ठा कर दही/छाछ बनाया जाता है और अगले दिन भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है.
  • मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण) का प्रतीक है, जो सकारात्मकता और प्रगति का सूचक है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: गवि गंगाधरेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति पर सूर्यदेव द्वारा शिवलिंग का राजतिलक एक अद्भुत वार्षिक घटना है.

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