नई दिल्ली. एक समय था जब गुजराती सिनेमा सिर्फ गांव की कहानियों और पारंपरिक लोक संगीत तक ही सीमित था, लेकिन पिछले एक दशक में 'धोलीवुड' ने खुद को बदल लिया है. 'केवी रीते जैश' से शुरू हुआ शहरी सिनेमा का यह सफर अब नेशनल अवॉर्ड्स तक पहुंच गया है. आज हम 6 लैंडमार्क गुजराती फिल्मों के बारे में बात कर रहे हैं जिन्होंने न सिर्फ सिनेमा का चेहरा बदला बल्कि दर्शकों को वापस थिएटर तक भी लाया. इन फिल्मों में एक सस्पेंस थ्रिलर भी है जिसकी कहानी बॉलीवुड की 'दृश्यम' को भी फीका लगा देती है. आइए गुजराती सिनेमा की इन गेम-चेंजिंग मास्टरपीस के बारे में जानें.
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News1817-02-2026, 13:09

गुजराती सिनेमा की 6 फिल्में जिन्होंने उड़ाए होश: नंबर 4 का सस्पेंस 'दृश्यम' से भी आगे.

  • एक दशक में गुजराती सिनेमा ने खुद को बदला, 'केवी रीते जैश' से शुरू होकर नेशनल अवार्ड तक का सफर तय किया.
  • 'केवी रीते जैश' (2012) ने आधुनिक गुजराती सिनेमा को नया जन्म दिया, युवाओं को अपनी भाषा से जोड़ा.
  • 'बे यार' (2014) ने भावनात्मक गहराई दी, जबकि 'छेल्लो दिवस' (2015) कॉलेज के दोस्तों की कहानी से सनसनी बन गई.
  • 'रॉन्ग साइड राजू' (2016) ने सस्पेंस और थ्रिलर के नए मानक स्थापित किए, इसका क्लाइमेक्स 'दृश्यम' से भी बेहतर माना गया.
  • 'लव नी भवाई' (2017) एक रोमांटिक कॉमेडी मील का पत्थर बनी, और 'हेल्लारो' (2019) ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता.

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