नई दिल्ली. कुछ बॉलीवुड फिल्में ऐसी हैं जिनकी कहानियां हमेशा फ्रेश रहती हैं. शहीद भगत सिंह की बहादुरी की कहानी 'शहीद' उनमें से एक है, लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि एक ही कहानी पर बनी तीन बड़ी फिल्में एक ही साल, महीने और हफ्ते में रिलीज हों? 2002 में बॉलीवुड ने एक ऐसा समय देखा जब बॉक्स ऑफिस 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों से गूंज उठा था. मुकाबला बहुत कड़ा था- एक तरफ नेशनल अवॉर्ड विनर अजय देवगन थे और दूसरी तरफ बॉलीवुड का सबसे ताकतवर 'देओल खानदान' और सोनू सूद. आज की स्पेशल रिपोर्ट में, हम आपको उन 4 फिल्मों के बारे में विस्तार से बताएंगे जो एक ही कहानी पर बनकर तैयार हुई थीं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 1 ही फिल्म सफल हो पाई.
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News1819-02-2026, 13:00

भगत सिंह की फिल्में: 1 कहानी, 4 फिल्में, एक ही क्लाइमैक्स; 3 एक साथ रिलीज, दर्शक हुए कंफ्यूज.

  • 2002 में, शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित तीन बड़ी फिल्में कुछ ही हफ्तों के भीतर रिलीज हुईं, जिससे दर्शक भ्रमित हो गए.
  • इन फिल्मों में अजय देवगन की "द लीजेंड ऑफ भगत सिंह," बॉबी और सनी देओल की "23 मार्च 1931: शहीद," और सोनू सूद की "शहीद-ए-आजम" शामिल थीं.
  • मनोज कुमार की 1965 की फिल्म "शहीद" बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और भगत सिंह की भविष्य की बायोपिक्स के लिए एक मानक स्थापित किया.
  • बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष के बावजूद, अजय देवगन की फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जो सबसे प्रशंसित संस्करण बन गई.
  • अजय देवगन और देओल भाइयों के बीच टकराव तीव्र था, रचनात्मक मतभेदों के कारण अलग-अलग परियोजनाएं बनीं.

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