धर्मेंद्र की वो कालजयी फिल्म, जिसने जीता राष्ट्रीय पुरस्कार, आज एक उत्कृष्ट कृति मानी जाती है, जिसने दर्शकों को खूब तरसाया.
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धर्मेंद्र की कालजयी फिल्म 'सत्यकाम' ने जीता नेशनल अवॉर्ड, आज भी मास्टरपीस
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News18•19-03-2026, 20:05
धर्मेंद्र की कालजयी फिल्म 'सत्यकाम' ने जीता नेशनल अवॉर्ड, आज भी मास्टरपीस
•धर्मेंद्र की 1969 की फिल्म 'सत्यकाम', जिसमें शर्मिला टैगोर भी थीं, को अब एक कल्ट क्लासिक माना जाता है और इसने हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था.
•धर्मेंद्र ने अपने बहनोई की मदद के लिए 'सत्यकाम' में अपना सारा पैसा (₹25 लाख) लगाया और मुफ्त में काम किया, भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.
•शर्मिला टैगोर ने कपिल शर्मा के शो में खुलासा किया कि धर्मेंद्र दयालु थे और सेट पर 'गंदे चुटकुले' सुनाते थे; उनका जन्मदिन धर्मेंद्र के साथ एक ही दिन आता था.
•धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर ने लगभग 10 फिल्मों में काम किया, जिनमें 'सत्यकाम', 'चुपके चुपके' (1975) और 'एक महल हो सपनों का' (1975) दर्शकों की पसंदीदा थीं.
•ऋषिकेश मुखर्जी की 'चुपके चुपके' (1975) एक ब्लॉकबस्टर थी, जिसमें अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी ने मुफ्त में काम किया; 'एक महल हो सपनों का' (1975) में मोहम्मद रफी का एक हिट शीर्षक गीत था.