नई दिल्ली. मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक परिवार ऐसा भी था, जिसने सपनों को जिंदा रखने के लिए दिन-रात मेहनत की. पिता सड़कों पर नारियल पानी बेचकर घर चलाते थे, जबकि मां लोगों के घरों में सफाई कर परिवार की जिम्मेदारी संभालती थीं. तंग गलियों में पले-बढ़े उस बेटे ने बचपन से संघर्ष देखा, लेकिन मुश्किलों ने उसके हौसले को और मजबूत किया. पढ़ाई के साथ-साथ उसने छोटे-छोटे मंचों पर अभिनय का अभ्यास शुरू किया, क्योंकि उसके भीतर सिनेमाई दुनिया की आग जल रही थी. परिवार की आर्थिक बाधाएं, समाज की टिप्पणी और असुरक्षाएं सब उसके रास्ते में आईं, पर वह रुका नहीं... धीरे-धीरे छोटे पर्दे से लेकर बड़े मंच तक उसकी पहचान बनने लगी. मेहनत, अनुशासन और अभिनय कौशल ने उसे एक ऐसा मुकाम दिलाया कि आज उसका नाम वैश्विक मंच पर गूंज रहा है. संघर्ष की कहानी से सफलता की गाथा लिखते हुए इस बेटे ने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया.
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News1820-12-2025, 11:57

नारियल पानी बेचने वाले का बेटा, अब ऑस्कर की दौड़ में: विशाल जेठवा की प्रेरणादायक कहानी.

  • विशाल जेठवा, जिनके पिता नारियल पानी बेचते थे और मां घरों में सफाई करती थीं, गरीबी से निकलकर एक प्रसिद्ध अभिनेता बने.
  • उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन से की, 'भारत का वीर पुत्र – महाराणा प्रताप' जैसे शो में पहचान बनाई.
  • उनकी हिंदी फिल्म की शुरुआत 'मर्दानी 2' में रानी मुखर्जी के सामने खलनायक 'सनी' के प्रभावशाली किरदार से हुई.
  • उनकी फिल्म 'होमबाउंड', नीरज घेवान द्वारा निर्देशित, ऑस्कर 2026 की सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए शॉर्टलिस्ट हुई है.
  • 'होमबाउंड' को कान फिल्म फेस्टिवल 2025 में नौ मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला, जिससे विशाल के अभिनय को वैश्विक पहचान मिली.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: विशाल जेठवा की संघर्ष से ऑस्कर तक की यात्रा कड़ी मेहनत का प्रमाण है.

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