नई दिल्ली. साल 2001 बॉलीवुड के लिए एक क्रांतिकारी साल था. जहां 'लगान' और 'गदर' जैसी फिल्में इतिहास रच रही थीं, वहीं 2 फरवरी 2001 को एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसने सस्पेंस और थ्रिलर का मतलब ही बदल दिया. वह फिल्म थी 'कसूर'. डायरेक्टर विक्रम भट्ट की इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों को डराया, बल्कि उन्हें एक ऐसे साइकोलॉजिकल गेम में उलझा दिया, जहां 'सच' और 'झूठ' के बीच की लाइन धुंधली हो गई. आज जब यह फिल्म अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर रही है, तो आइए जानते हैं इस कल्ट क्लासिक की पूरी कहानी और इसके पीछे के दिलचस्प राज.
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News1802-02-2026, 11:09

कसूर: बॉलीवुड की बेस्ट थ्रिलर फिल्म के 25 साल पूरे, सस्पेंस की नई परिभाषा गढ़ी.

  • 2 फरवरी 2001 को रिलीज हुई 'कसूर' ने बॉलीवुड में सस्पेंस और थ्रिलर की नई परिभाषा गढ़ी, हॉलीवुड फिल्म 'जैग्ड एज' से प्रेरित थी.
  • आफताब शिवदासानी ने 'चॉकलेट बॉय' की इमेज तोड़कर शेखर सक्सेना के रूप में दमदार प्रदर्शन किया, जिस पर पत्नी की हत्या का आरोप था.
  • लीजा रे ने वकील सिमरन भार्गव का किरदार निभाया, जिसका अपने मुवक्किल के साथ भावनात्मक जुड़ाव कहानी को गहराई देता है.
  • नदीम-श्रवण का सदाबहार संगीत, जिसमें 'जिंदगी बन गए हो तुम' जैसे गाने शामिल हैं, ने थ्रिलर को रोमांटिक स्पर्श दिया.
  • फिल्म का क्लाइमेक्स, जहां सिमरन शेखर के टाइपराइटर से सच्चाई उजागर करती है, बॉलीवुड के बेहतरीन क्लाइमेक्स में से एक माना जाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 'कसूर' अपनी दमदार कहानी, बेहतरीन अभिनय और यादगार संगीत के लिए आज भी एक कल्ट क्लासिक है.

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