नई दिल्ली. अगर बॉलीवुड के इतिहास में किसी एक दशक को 'बदलाव का दशक' कहा जा सकता है, तो वह निस्संदेह 1970 का दशक होगा. यह वह दौर था जब एक तरफ राजेश खन्ना के सॉफ्ट रोमांस का सूरज डूब रहा था और दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन का 'एंग्री यंग मैन' उभर रहा था, लेकिन 1973 में 'जंजीर' की सफलता के बाद, जब सभी ने मान लिया था कि राजेश खन्ना का दौर खत्म हो गया है तो 1974 में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया.
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News1829-01-2026, 16:32

1974 में राजेश खन्ना की 2 फिल्मों ने अमिताभ की आंधी को रोका, लगा था तख्तापलट होगा.

  • 1970 का दशक बॉलीवुड में बदलाव का दौर था, जहाँ राजेश खन्ना का रोमांटिक दौर ढल रहा था और अमिताभ बच्चन का 'एंग्री यंग मैन' उभर रहा था.
  • 1973 में 'जंजीर' की सफलता के बाद, 1974 में राजेश खन्ना की दो फिल्में, 'अजनबी' और 'रोटी' रिलीज़ हुईं, जिन्होंने अमिताभ की बढ़ती लहर को अस्थायी रूप से रोक दिया.
  • 'अजनबी' ने खन्ना के रोमांटिक अंदाज़ को फिर से स्थापित किया, जबकि 'रोटी' ने उन्हें एक्शन हीरो के रूप में पेश किया, अमिताभ के क्षेत्र में कदम रखा.
  • इन फिल्मों की सफलता से यह अटकलें लगने लगीं कि खन्ना अपनी सुपरस्टार की स्थिति फिर से हासिल कर सकते हैं, खासकर जब अमिताभ की 1974 की कुछ फिल्में कम प्रभावी रहीं.
  • हालांकि, यह 'तख्तापलट' अल्पकालिक रहा, क्योंकि 1975 में अमिताभ बच्चन की 'दीवार' और 'शोले' ने उनकी सुपरस्टारडम को मजबूत किया और भारतीय सिनेमा को फिर से परिभाषित किया.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: राजेश खन्ना की 1974 की हिट फिल्में 'अजनबी' और 'रोटी' ने अमिताभ बच्चन के उदय को संक्षिप्त रूप से चुनौती दी, लेकिन 1975 की ब्लॉकबस्टर ने अमिताभ के शासन को मजबूत किया.

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