नई दिल्ली. 1970 के दशक के आखिर में अमिताभ बच्चन का राज था. 'जंजीर', 'दीवार' और 'शोले' जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता के उस मुकाम पर पहुंचा दिया था जो किसी और के लिए हासिल करना नामुमकिन लगता था. लेकिन इसी दौरान, विनोद खन्ना एक डार्क हॉर्स के रूप में उभरे. जहां अमिताभ बच्चन अपनी विद्रोही युवा इमेज के लिए जाने जाते थे, वहीं विनोद खन्ना अपनी मर्दानगी, रफ-एंड-टफ लुक और सहज एक्टिंग से दर्शकों खासकर महिलाओं के बीच बहुत पॉपुलर हो रहे थे.
फिल्में
N
News1831-01-2026, 15:04

अमिताभ बच्चन का सिंहासन हिलाने वाली फिल्म: विनोद खन्ना बने प्रोड्यूसर्स की पहली पसंद

  • 1970 के दशक के अंत में अमिताभ बच्चन का दबदबा था, लेकिन विनोद खन्ना एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे.
  • मनमोहन देसाई की 'परवरिश' (1977) में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना ने भाइयों की भूमिका निभाई, जिसमें खन्ना ने ग्रे-शेड भूमिका निभाई.
  • 'परवरिश' में विनोद खन्ना की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने अक्सर अमिताभ बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया, ऐसा आलोचकों और दर्शकों ने माना.
  • 'परवरिश' के बाद, विनोद खन्ना अपनी बहुमुखी प्रतिभा और अपील के कारण निर्माताओं की पहली पसंद बन गए, जिससे अमिताभ की सर्वोच्चता को चुनौती मिली.
  • 1982 में अपने करियर के चरम पर ओशो के आश्रम जाने के लिए खन्ना का अचानक फिल्म उद्योग छोड़ना, अमिताभ बच्चन के लिए निर्विवाद सुपरस्टारडम का मार्ग प्रशस्त कर गया.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 'परवरिश' में विनोद खन्ना के प्रदर्शन ने अमिताभ बच्चन के प्रभुत्व को चुनौती दी, जिससे वह एक जबरदस्त प्रतिद्वंद्वी बन गए.

More like this

Loading more articles...