केंद्रीय बजट: 1950 के दशक के प्रिंट से आज के डिजिटल तक — एक ऐतिहासिक यात्रा

भारत
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News18•01-02-2026, 10:40
केंद्रीय बजट: 1950 के दशक के प्रिंट से आज के डिजिटल तक — एक ऐतिहासिक यात्रा
- •शुरुआती केंद्रीय बजट सार्वजनिक प्रसार के लिए समाचार पत्रों पर बहुत अधिक निर्भर करते थे, जिसमें पहले पन्ने जनता की धारणा को आकार देते थे.
- •सी.डी. देशमुख और लाल बहादुर शास्त्री जैसे वित्त मंत्रियों के बजट प्रिंट में विस्तृत थे, जिसमें राजस्व, व्यय और नए कर शामिल थे.
- •समाचार पत्र सीधे रिपोर्टिंग से अधिक संरचित, पाठक-अनुकूल प्रारूपों में विकसित हुए, जिसमें बजट प्रस्तावों को समझाने के लिए उप-शीर्षक थे.
- •1962 के युद्ध के बाद रक्षा खर्च बजट कवरेज का एक प्रमुख केंद्र बन गया, जिसने कर कटौती की संभावनाओं को प्रभावित किया.
- •1970 के दशक में दृश्य कहानी कहने का उदय हुआ, जिसमें सामान्य घरों को शामिल करने और बजट के निहितार्थों पर बहस छेड़ने के लिए छवियों का उपयोग किया गया.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: केंद्रीय बजट रिपोर्टिंग प्रिंट-निर्भर, विस्तृत खातों से आधुनिक, दृश्यात्मक रूप से आकर्षक प्रारूपों में बदल गई है.
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