हर्ष केवल योद्धा नहीं बल्कि महान साहित्यकार और कला प्रेमी भी था. उसने 'रत्नावली', 'प्रियदर्शिका' और 'नागानंद' जैसे नाटकों की रचना की. उसके दरबार में विद्वानों और कलाकारों को सम्मान मिलता था. चीनी यात्री ह्वेन त्सांग पांच वर्षों तक उसके दरबार में रहा और उसने हर्ष को दयालु और विद्वान शासक बताया. हर्ष हर पांच वर्ष में प्रयाग में भव्य दान उत्सव आयोजित करता था जहां वह गरीबों को धन और वस्त्र दान करता था.
ज्ञान
N
News1810-02-2026, 10:35

पिता की मौत, भाई की हत्या: 16 साल की उम्र में कैसे 'महाबली' बना हर्षवर्धन?

  • हर्षवर्धन ने 16 साल की उम्र में पिता की मृत्यु, भाई की हत्या और बहन के अपहरण जैसी त्रासदियों का सामना किया.
  • उनके बड़े भाई राजवर्धन की कन्नौज में मालवा के देवगुप्त और गौड़ के शशांक ने धोखे से हत्या कर दी थी.
  • हर्ष ने देवगुप्त को हराया, अपनी बहन राजश्री को आत्मदाह से बचाया और शशांक के खिलाफ अभियान चलाया.
  • उनके शासनकाल (606-647 ईस्वी) में उन्होंने उत्तर भारत में अपने साम्राज्य का विस्तार किया, थानेसर और कन्नौज को राजधानी बनाया.
  • हर्ष एक योद्धा, विद्वान और कला के संरक्षक थे, उन्होंने नाटक लिखे और दान उत्सव आयोजित किए, जैसा कि बाणभट्ट और ह्वेनसांग ने दर्ज किया है.

More like this

Loading more articles...