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पालन-पोषण की बड़ी भूल: भारतीय पुरुष क्यों नहीं व्यक्त कर पाते अपनी भावनाएं? रिश्तों पर इसका गहरा असर.
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भारतीय पुरुष क्यों नहीं कर पाते जज्बात जाहिर? पेरेंटिंग की बड़ी भूल रिश्तों पर भारी.
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News18
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13-03-2026, 14:12
भारतीय पुरुष क्यों नहीं कर पाते जज्बात जाहिर? पेरेंटिंग की बड़ी भूल रिश्तों पर भारी.
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भारतीय परवरिश में 'प्यार' अक्सर 'सेवा' से जुड़ा होता है, जिससे मौखिक या भावनात्मक अभिव्यक्ति की कमी से 'भावनात्मक अंतर' पैदा होता है.
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'लड़के रोते नहीं' जैसी बातें लड़कों को भावनाओं को दबाना सिखाती हैं, जिससे वे बड़े होकर अपनी कमजोरियों को व्यक्त करने से डरते हैं.
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यह भावनात्मक अंतर रिश्तों को प्रभावित करता है, जहां पुरुष संवाद के बजाय 'खामोशी' या गुस्से का सहारा लेते हैं.
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विशेषज्ञ सक्रिय रूप से सुनने और घर को बच्चों के लिए अपनी असफलताओं और दुखों को व्यक्त करने का सुरक्षित स्थान बनाने की सलाह देते हैं.
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शारीरिक स्पर्श (गले लगाना) और मौखिक स्नेह बच्चों में आत्म-सम्मान और मानसिक सुरक्षा बढ़ाता है, उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है.
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