लेमनग्रास की खेती
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News1826-01-2026, 08:23

छत्तीसगढ़ में लेमनग्रास क्रांति: बंजर भूमि बनी उपजाऊ, पलायन रुका

  • गोरिल्ला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बंजर भूमि पर अब लेमनग्रास की खेती हो रही है, जिसे कम पानी और देखभाल की आवश्यकता होती है.
  • क्लस्टर मॉडल के तहत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सीधा बाजार पहुंच मिल रही है, बुवाई से पहले ही अनुबंध किए जाते हैं.
  • उद्योग बुवाई, बोरवेल और बाड़ लगाने के लिए अग्रिम सहायता प्रदान करते हैं, जिसे फसल बेचने के बाद चुकाया जाता है, जिससे छोटे किसान बिना कर्ज के खेती शुरू कर सकते हैं.
  • जिले में आसवन इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिससे किसानों को कच्चा माल दूर तक ले जाने की आवश्यकता नहीं होती और स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन होता है.
  • लेमनग्रास की खेती ने स्थानीय रोजगार बढ़ाया है, जिससे पलायन रुका है और अघाहन सिंह जैसे किसानों की आय में वृद्धि हुई है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: छत्तीसगढ़ में लेमनग्रास की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रही है, आय प्रदान कर रही है और पलायन रोक रही है.

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