
किसान जैविक और घरेलू उपचारों का उपयोग करके, खेतों की नियमित निगरानी करके, संतुलित सिंचाई सुनिश्चित करके और पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखकर भविष्य में होने वाले इल्लियों के प्रकोप को रोक सकते हैं।
यह कीट अरंडी और बाजरा जैसी फसलों को काफी नुकसान पहुँचा रहा है, जिससे गुणवत्ता और उपज प्रभावित हो रही है। यह चारे को भी प्रभावित करता है, जिससे मनुष्यों और पशुधन में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
उपलब्ध जानकारी के आधार पर, इस कीट के लिए विकसित किए जा रहे नए जैविक नियंत्रणों के बारे में विवरण वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं।