कौसानी का अनासक्ति आश्रम: जहाँ आज भी जीवित हैं गांधीजी की यादें और शांति.

बागेश्वर
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News18•29-12-2025, 20:00
कौसानी का अनासक्ति आश्रम: जहाँ आज भी जीवित हैं गांधीजी की यादें और शांति.
- •उत्तराखंड के कौसानी में स्थित अनासक्ति आश्रम में महात्मा गांधी 1929 में ठहरे थे, जहाँ उन्होंने 'अनासक्ति योग' का अनुवाद किया.
- •गांधीजी कौसानी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होकर इसे 'भारत का मिनी स्विट्जरलैंड' कहा था.
- •आश्रम में गांधीजी से जुड़ी वस्तुएं, दुर्लभ तस्वीरें, पत्र और दस्तावेज संरक्षित हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाते हैं.
- •यह स्थान ध्यान और आत्म-चिंतन के लिए शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, हिमालय की गोद में मानसिक शांति का केंद्र है.
- •आश्रम में एक पुस्तकालय है जिसमें गांधीवादी साहित्य और 'अनासक्ति योग' सहित कई महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अनासक्ति आश्रम कौसानी में गांधीजी की विरासत, शांति और हिमालयी सुंदरता का संगम है.
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