
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिद्येश्वरी मंदिर की वेदी के बारे में और साड़ी चढ़ाने के बावजूद उसकी ऊंचाई क्यों नहीं बढ़ती, इस संबंध में विवरण वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं।
कोठा अमावस्या पर, देवी को नैवेद्य के हिस्से के रूप में एक मुर्गा चढ़ाया जाता है। यह भेंट एक परंपरा है, और फिर मुर्गे को भक्तों द्वारा प्रसाद के रूप में स्वीकार किया जाता है।