पौष माह का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत 01 जनवरी 2026 को किया जाएगा।
धर्म
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Moneycontrol26-12-2025, 21:48

नववर्ष 2026 का आरंभ दुर्लभ प्रदोष व्रत से: 1 जनवरी को पाएं शिव कृपा.

  • नववर्ष 2026 का पहला दिन 1 जनवरी, दुर्लभ प्रदोष व्रत के साथ शुरू होगा, जो भगवान शिव का आशीर्वाद पाने का विशेष अवसर है.
  • प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है, जो कष्टों से मुक्ति और शुभ फल प्रदान करता है.
  • पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 31 दिसंबर देर रात शुरू होकर 1 जनवरी 2026 को देर रात समाप्त होगी.
  • पूजा विधि में 11 बेलपत्र, चंदन, शमी फूल अर्पित करना, शहद, घी, दही चढ़ाना और "ओम नमः शिवाय" मंत्र का जाप शामिल है.
  • शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाना, शक्तिशाली मंत्रों का जाप, पंचामृत अर्पित करना और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: 1 जनवरी को प्रदोष व्रत से 2026 की शुभ शुरुआत करें और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें.

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