Gurpreet Singh Sandhu’s remark sparks debate. (Photo: ISL)
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Moneycontrol07-01-2026, 20:43

गुरप्रीत के बयान से बहस तेज: महिला फुटबॉलर विदेश में बना रहीं पहचान.

  • गुरप्रीत सिंह संधू की भारतीय फुटबॉलरों के विदेश में खेलने पर टिप्पणी ने बहस छेड़ दी, पुरुषों के विदेशी अवसरों की तलाश में झिझक पर सवाल उठाए.
  • उन्होंने यूरोपीय क्लबों में भारतीय खिलाड़ियों के लिए जगह बनाने की कठिनाई पर जोर दिया और घरेलू लीग को मजबूत करने की वकालत की.
  • घरेलू समर्थन की कमी का सामना करते हुए, भारतीय महिला फुटबॉलर तेजी से विदेश में खेल रही हैं और अंतरराष्ट्रीय लीगों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर रही हैं.
  • मनीषा कल्याण (UEFA Women’s Champions League) और ज्योति चौहान (क्रोएशियाई कप) जैसी प्रमुख महिला खिलाड़ियों ने इस विपरीत प्रवृत्ति को उजागर किया है.
  • इंडियन वुमेन्स लीग में वित्तीय और ढांचागत अंतर अक्सर विकास और स्थिरता के लिए विदेशी कदम को आवश्यक बनाता है, जिस पर अब पुरुष खिलाड़ियों को भी विचार करना चाहिए.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: महिला फुटबॉलरों की विदेशी सफलता पुरुषों के आराम क्षेत्र को चुनौती देती है, भारत से परे विकास की आवश्यकता को उजागर करती है.

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