'भारत में कोचिंग एक धन्यवाद रहित काम': दिग्गज भाला फेंक कोच नवल सिंह का खुलासा.

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Firstpost•21-12-2025, 17:06
'भारत में कोचिंग एक धन्यवाद रहित काम': दिग्गज भाला फेंक कोच नवल सिंह का खुलासा.
- •दिग्गज भाला फेंक कोच नवल सिंह ने भारत में कोचिंग को "धन्यवाद रहित काम" बताया, सम्मान और वित्तीय प्रोत्साहन की कमी पर जोर दिया.
- •सिंह का मानना है कि भारत पांच साल में वैश्विक भाला फेंक महाशक्ति बन सकता है, देश में अपार अप्रयुक्त प्रतिभा, खासकर ग्रामीण लड़कियों में.
- •उन्होंने 10 शहरों में भाला फेंक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने, समर्पित कोचों को 1 लाख रुपये प्रति माह वेतन देने और प्रत्येक कोच को 10 युवाओं को प्रशिक्षित करने का मॉडल सुझाया.
- •फिनलैंड और जर्मनी जैसे देशों में कोचों को भारत की तुलना में अधिक सम्मान मिलता है, जबकि वे एथलीटों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
- •सिंह ने एएफआई, साई और खेल मंत्रालय जैसे हितधारकों से कोचों का समर्थन करने और खेल-विशिष्ट प्रायोजकों की आवश्यकता पर बल दिया.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत में भाला फेंक की अपार क्षमता है, लेकिन कोचों को बेहतर समर्थन और संरचित प्रणाली चाहिए.
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