
सरसों की पराली जलाने से वायु प्रदूषण, मृदा का निम्नीकरण और पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। इससे धुएं के कारण होने वाली दुर्घटनाएं भी होती हैं।
मिट्टी की उर्वरता को विभिन्न जैविक तरीकों से सुधारा जा सकता है, जिनमें समुद्री शैवाल का अर्क, वर्मीकम्पोस्ट, नीम की खली, सरसों की खली और गोबर की खाद का उपयोग शामिल है।