रांची का 'आइयो ढाबा' बना महिला सशक्तिकरण का प्रतीक, पुरुषों की 'नो एंट्री'!

सफलता की कहानी
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News18•30-01-2026, 15:20
रांची का 'आइयो ढाबा' बना महिला सशक्तिकरण का प्रतीक, पुरुषों की 'नो एंट्री'!
- •रांची के खूंटी-चाइबासा रोड पर स्थित 'आइयो ढाबा' पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित है, बावर्ची से लेकर सफाई कर्मचारी तक सभी महिलाएं हैं.
- •मालिक कपिल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह पहल की, उनका मानना है कि महिलाओं द्वारा पकाए गए भोजन में 'मां के स्वाद' जैसी शुद्धता होती है.
- •ढाबे में मटन, चिकन और झारखंडी धुस्का जैसे लोकप्रिय व्यंजन परोसे जाते हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 2000 प्लेट बिकती हैं.
- •मीना देवी और शालिनी जैसी महिला कर्मचारी ₹12,000-₹20,000 कमा रही हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रही हैं.
- •यह पहल पुरुष-प्रधान उद्योग में महिलाओं की क्षमता को दर्शाती है, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संगम पेश करती है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रांची का 'आइयो ढाबा' महिलाओं द्वारा संचालित एक अनूठा प्रतिष्ठान है जो आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है.
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