अंतर्राष्ट्रीय तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है, हालांकि भारत अपनी मूल्य निर्धारण व्यवस्थाओं के कारण काफी हद तक अछूता रहा है।
पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का दीर्घकालिक प्रभाव सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व हानि है, जिसका अनुमान वित्त वर्ष 27 में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
सरकार ईंधन की कमी की अफवाहों को स्पष्ट रूप से यह बताकर दूर कर सकती है कि आपूर्ति स्थिर है।