How Norway’s social structure reshaped the Indian’s understanding of work. (Photo Credit: Instagram)
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News1823-12-2025, 18:45

भारतीय ने ₹3.5 लाख की नौकरी छोड़ी नॉर्वे में बेहतर जीवन के लिए.

  • भारतीय शिप अधिकारी सचिन ने नॉर्वे में जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए मर्चेंट नेवी की उच्च-वेतन वाली नौकरी छोड़ी.
  • वह नॉर्वे के समतावादी समाज की प्रशंसा करते हैं, जहाँ नागरिकों को समान माना जाता है और काम आत्म-मूल्य को परिभाषित नहीं करता.
  • नॉर्वे में बुनियादी ज़रूरतों के तनाव की कमी परिवार, स्वास्थ्य और शौक पर ध्यान केंद्रित करने देती है, जिससे लोग "पूरी तरह से जीवन जीते हैं."
  • सचिन ने अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या दुबई की तुलना में कम वेतन के बावजूद नॉर्वे को चुना, कम तनाव और अधिक जीने के समय को महत्व दिया.
  • ऑनलाइन चर्चा में "जीवन की गुणवत्ता" पर अलग-अलग विचार सामने आए, कुछ लोग प्रवास लाभों पर परिवार/जड़ों को महत्व देते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारतीय व्यक्ति ने उच्च-वेतन वाली नौकरी के बजाय नॉर्वे के समतावादी समाज और जीवन की गुणवत्ता को चुना.

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