The conference titled “Racism and Violence Against Sikhs and Other National Minorities in India: The Reality on the Ground” marks a decisive escalation in attempts to pressure New Delhi through global platforms. (Image Source: X/Allen Hampton)
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Moneycontrol21-01-2026, 22:34

अजरबैजान बना खालिस्तान विमर्श का नया मंच, पाक-तुर्की धुरी का समर्थन: भारत को सतर्क रहना चाहिए.

  • अजरबैजान ने खालिस्तान विमर्श को बढ़ावा देने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की, जो अजरबैजान-पाकिस्तान-तुर्की धुरी द्वारा भारत के खिलाफ एक नए भू-राजनीतिक मोर्चे का संकेत है.
  • “भारत में सिखों और अन्य राष्ट्रीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लवाद और हिंसा: जमीन पर वास्तविकता” शीर्षक वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के आंतरिक सुरक्षा मुद्दों का अंतरराष्ट्रीयकरण करना था.
  • सरकारी-संबद्ध बाकू इनिशिएटिव ग्रुप (BIG) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में खालिस्तानी चरमपंथी और पाकिस्तानी अधिकारी शामिल थे, जिनमें पाकिस्तान के पंजाब मानवाधिकार और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा भी थे.
  • प्रतिभागियों ने भारत में कथित “अतिरिक्त-न्यायिक हत्याओं” की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति से संपर्क करने पर चर्चा की और हरदीप सिंह निज्जर को शहीद के रूप में पेश किया.
  • बाकू को स्थल के रूप में चुनने से अजरबैजान-पाकिस्तान-तुर्की गठबंधन उजागर होता है, जिसमें अजरबैजान खालिस्तानी प्रचार को बढ़ावा देने और चरमपंथी तत्वों के लिए एक 'तटस्थ' मंच प्रदान करने के लिए BIG का पुनरुत्पादन कर रहा है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: अजरबैजान अब पाकिस्तान-तुर्की धुरी के समर्थन से खालिस्तान विमर्श का मंच बन गया है, जो भारत के लिए एक नई चुनौती है.

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