बांग्लादेश चुनाव से पहले चीनी दूत ने जमात-ए-इस्लामी से की मुलाकात: एक रणनीतिक कदम.
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Firstpost12-01-2026, 19:46

बांग्लादेश चुनाव से पहले चीनी दूत ने जमात-ए-इस्लामी से की मुलाकात: एक रणनीतिक कदम.

  • चीनी राजदूत याओ वेन ने जमात-ए-इस्लामी अमीर शफीकुर रहमान से मुलाकात की, जिससे दक्षिण एशियाई रणनीतिक हलकों में ध्यान आकर्षित हुआ.
  • इस बैठक को बांग्लादेश के राष्ट्रीय चुनावों से पहले बीजिंग द्वारा अपने हितों की रक्षा के लिए एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है, न कि इस्लामी पार्टी की विचारधारा का समर्थन.
  • चीन जमात-ए-इस्लामी की महत्वपूर्ण सड़क-लामबंदी क्षमता को पहचानता है, इसे विरोध प्रदर्शनों और मतदाता मतदान को आकार देने में 'बल गुणक' मानता है.
  • बीजिंग की यह पहल बांग्लादेश के चुनाव के बाद के राजनीतिक परिदृश्य पर अनिश्चितता से प्रेरित है और इसका उद्देश्य बेल्ट एंड रोड पहल के तहत अपने निवेश को अशांति से बचाना है.
  • यह जुड़ाव चीन को क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद करता है, ढाका में नई दिल्ली की उपस्थिति के प्रति संतुलन के रूप में जमात के भारत-संशयवादी रुख का लाभ उठाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: बांग्लादेश के अनिश्चित चुनावों के बीच चीन की जमात-ए-इस्लामी के साथ बैठक हितों को सुरक्षित करने की एक व्यावहारिक जोखिम-हेजिंग रणनीति है.

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