In the Arctic, China's military presence, while modest, has also grown, mainly in collaboration with Russia since 2022.
दुनिया
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Moneycontrol23-01-2026, 05:10

रूस और चीन आर्कटिक में बढ़ा रहे अपनी उपस्थिति, रणनीतिक हित बने वजह.

  • रूस और चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की किसी भी योजना से इनकार करते हैं, लेकिन आर्कटिक के रणनीतिक महत्व के कारण अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं.
  • रूस और चीन 2010 के दशक से उत्तरी समुद्री मार्ग (NSR) का विकास कर रहे हैं, जो गर्म जलवायु के कारण संभव हुआ है.
  • रूस का लक्ष्य NSR के माध्यम से शिपिंग को अधिकतम करना है, जो अटलांटिक, प्रशांत और आर्कटिक महासागरों को जोड़ता है, और 2035 तक €20 बिलियन का निवेश किया है.
  • चीन ने 2018 में अपनी पोलर सिल्क रोड परियोजना शुरू की, जिसका लक्ष्य 2030 तक "ध्रुवीय शक्ति" बनना है और आइसलैंड तथा नॉर्वे में वैज्ञानिक अनुसंधान स्टेशन स्थापित किए हैं.
  • रूस नई हवाई पट्टियों, S-400 प्रणालियों, रडार ठिकानों और चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों के साथ अपनी आर्कटिक सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहा है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: रूस और चीन व्यापार और सैन्य हितों से प्रेरित होकर आर्कटिक में अपना रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहे हैं.

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