
मध्य पूर्वी देश भविष्य के संघर्षों के प्रभावों को कम करने के लिए आयात में विविधता लाने, नए निर्यात बाजारों की तलाश करने और समन्वित सरकारी दृष्टिकोणों को लागू करने जैसी रणनीतियाँ अपना सकते हैं[2]।
एक लंबा मध्य पूर्व संघर्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करके, कीमतों में वृद्धि का कारण बनकर, और संभावित रूप से दीर्घकालिक एलएनजी आपूर्ति समस्याओं को जन्म देकर वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया आकार देता है[1][5]।
क्षेत्रीय अस्थिरता से मानवीय आपातकाल, गरीबी में वृद्धि और नौकरियों का नुकसान हो सकता है[1][2]।