भारत-ईयू एफटीए पर कार्बन टैक्स का खतरा: निर्यातकों के लिए CBAM बड़ी चुनौती.

ओपिनियन
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CNBC TV18•17-12-2025, 07:17
भारत-ईयू एफटीए पर कार्बन टैक्स का खतरा: निर्यातकों के लिए CBAM बड़ी चुनौती.
- •यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के कारण भारत-ईयू एफटीए वार्ता में बाधाएं आ रही हैं, जिससे 2025 के बाद भी निष्कर्ष में देरी हो रही है.
- •1 जनवरी, 2026 से प्रभावी CBAM, स्वच्छ उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए स्टील और एल्यूमीनियम जैसे आयातों पर कार्बन टैक्स लगाएगा.
- •भारत, एक प्रमुख स्टील उत्पादक, CBAM का एक गैर-टैरिफ बाधा के रूप में विरोध करता है, यह तर्क देते हुए कि यह WTO सिद्धांतों को कमजोर करता है और US$8 बिलियन के निर्यात को प्रभावित करता है.
- •भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) का उद्देश्य डीकार्बोनाइजेशन को प्रोत्साहित करना है, लेकिन प्रभावशीलता के लिए अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की आवश्यकता है.
- •भारत को CBAM के प्रभाव को कम करने के लिए CCTS को मजबूत करके, नए बाजारों की तलाश करके और उद्योगों को डीकार्बोनाइज करके अनुकूलन करना होगा.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: ईयू का कार्बन टैक्स (CBAM) भारत-ईयू एफटीए के लिए एक बड़ी गैर-टैरिफ बाधा है, जिसके लिए भारत को रणनीतिक अनुकूलन की आवश्यकता है.
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