U.S. President Donald Trump and India's Prime Minister Narendra Modi embrace during a joint news conference after bilateral talks at Hyderabad House in New Delhi, India, February 25, 2020. REUTERS/Adnan Abidi
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CNBC TV1804-02-2026, 06:53

क्या यूरोप के एफटीए ने वाशिंगटन को भारत व्यापार समझौते में जल्दबाजी करने पर मजबूर किया?

  • भारत द्वारा यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने के कुछ हफ्तों बाद अमेरिका ने भारत के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा की, जो वैश्विक व्यापार मानचित्र में खुद को फिर से स्थापित करने का प्रयास दर्शाता है.
  • अमेरिकी दृष्टिकोण से, यूरोपीय संघ-भारत एफटीए ने भारतीय बाजारों में यूरोपीय फर्मों के लिए पहले-प्रवर्तक लाभ का जोखिम पैदा किया, जिससे वाशिंगटन को तेजी से कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया.
  • भारत अमेरिकी घोषणा को पहले के टैरिफ वृद्धि के आंशिक उलटफेर के रूप में देखता है, न कि एक नई तरजीही व्यवस्था के रूप में, और कागजों पर ठोस प्रतिबद्धताओं का इंतजार कर रहा है.
  • अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में प्रमुख चूक में सेवाएं, कुशल गतिशीलता और डेटा प्रवाह शामिल हैं, जो भारत के आर्थिक लाभ और अमेरिकी बाजार तक फर्मों की पहुंच के लिए महत्वपूर्ण हैं.
  • भारत की सावधानी अमेरिकी अपेक्षाओं को अपनी नियामक संप्रभुता, ऊर्जा सुरक्षा (रूसी तेल) और कृषि तथा डेयरी जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता से उपजी है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यूरोप के भारत के साथ एफटीए ने अमेरिका को अपने व्यापार समझौते की घोषणा करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन भारत सतर्क है.

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