मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातक
ज्योतिषीय सुझाव
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News1823-01-2026, 19:43

मृगशिरा नक्षत्र: क्यों एक जगह नहीं टिकते इसके जातक? जानें स्वभाव का गहरा रहस्य.

  • मृगशिरा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से पाँचवाँ है, जो वृषभ के 23°20′ से मिथुन के 6°40′ तक फैला है, जो जिज्ञासा और अन्वेषण का प्रतीक है.
  • इसका स्वामी ग्रह मंगल है, जो जातकों को ऊर्जा, साहस और प्रगति की इच्छा देता है, जिससे वे सक्रिय और कभी-कभी बेचैन रहते हैं.
  • प्रमुख विशेषताओं में जिज्ञासु स्वभाव, रचनात्मक सोच, सौम्य व्यवहार और उच्च मानसिक गतिविधि शामिल है; उन्हें नीरसता पसंद नहीं.
  • जातक बुद्धिमान, मिलनसार, बहु-प्रतिभाशाली और आत्मविश्वासी होते हैं, हालांकि अधिक सोचने से निर्णय लेने में देरी हो सकती है.
  • मृगशिरा नक्षत्र में नए कार्य, अध्ययन, कलात्मक गतिविधियाँ, यात्रा और आध्यात्मिक अभ्यास जैसे कार्य शुभ माने जाते हैं.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मृगशिरा नक्षत्र के जातक अपनी बेचैन जिज्ञासा, रचनात्मकता और निरंतर अन्वेषण की इच्छा के लिए जाने जाते हैं.

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