भारत के रचनाकार सूक्ष्म-बाजारों की हलचल के बीच स्थानीय हो रहे हैं; पारंपरिक मीडिया और मेट्रो के प्रभुत्व से मुक्ति पा रहे हैं.
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भारत की क्रिएटर इकोनॉमी हुई हाइपरलोकल: टियर 2/3 शहर मेट्रो से आगे, ब्रांड रणनीतियों में बदलाव.
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CNBC TV18•04-03-2026, 17:52
भारत की क्रिएटर इकोनॉमी हुई हाइपरलोकल: टियर 2/3 शहर मेट्रो से आगे, ब्रांड रणनीतियों में बदलाव.
•भारत की क्रिएटर इकोनॉमी तेजी से मेट्रो-केंद्रित से हाइपरलोकल हो रही है, नए डेटा में 10,346 पिनकोड में व्यापक उपस्थिति का खुलासा हुआ है.
•लखनऊ, जयपुर, पटना, मेरठ और भोपाल जैसे उभरते शहर अब महत्वपूर्ण क्रिएटर क्लस्टर बन गए हैं, जो कभी-कभी पारंपरिक मेट्रो शहरों को भी पीछे छोड़ रहे हैं.
•यह हाइपरलोकल ट्रेंड ब्रांडों को पड़ोस-स्तर के अभियानों और क्षेत्रीय उत्पाद लॉन्च के लिए नए अवसर प्रदान करता है, जो अक्सर मेट्रो-केंद्रित रणनीतियों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं.
•क्रिएटर्स को अभूतपूर्व स्वायत्तता मिल रही है, वे पारंपरिक संस्थानों के बाहर स्थायी करियर बना रहे हैं, जिसमें स्थानीय सहयोग और सब्सक्रिप्शन जैसे विविध मुद्रीकरण मॉडल शामिल हैं.
•ब्रिटिश काउंसिल और Big Bang Social के विशेषज्ञ सफलता की बदलती परिभाषा पर प्रकाश डालते हैं, जो पारंपरिक सत्यापन के बजाय स्वतंत्रता, अनुकूलनशीलता और सीधे सामुदायिक विश्वास पर जोर देती है.