भारत की कूटनीति: 'सहयोगी' से परहेज, 'रणनीतिक साझेदार' पर जोर.

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News18•13-12-2025, 13:43
भारत की कूटनीति: 'सहयोगी' से परहेज, 'रणनीतिक साझेदार' पर जोर.
- •भारत की कूटनीतिक भाषा, जैसे 'सहयोगी', 'साझेदार' या 'रणनीतिक साझेदार', सटीक है और उलझाव के बिना जुड़ाव की उसकी विदेश नीति को दर्शाती है.
- •गुटनिरपेक्षता की जगह रणनीतिक स्वायत्तता ने ले ली है, जो भारत को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता और मुद्दों के आधार पर गठबंधन चुनने की अनुमति देती है.
- •भारत 'सहयोगी' शब्द से बचता है क्योंकि यह बाध्यकारी सैन्य प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है, जिससे भारत रणनीतिक लचीलापन बनाए रखने के लिए दूर रहता है.
- •'रणनीतिक साझेदारियाँ' और 'व्यापक रणनीतिक साझेदारियाँ' बिना बाध्यकारी दायित्वों के गहरे जुड़ाव के लिए घोषणात्मक उपकरण हैं.
- •भारत अमेरिका को 'व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदार' और रूस को 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदार' बताता है, जो संबंधों में भिन्नता को दर्शाता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारत की कूटनीतिक भाषा उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और लचीली विदेश नीति दर्शाती है.
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