सक्रिय और निष्क्रिय इच्छामृत्यु: कानूनी अंतर और इसका महत्व
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हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति: भारत में यूथेनेशिया कानून समझें.
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News18•11-03-2026, 14:57
हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति: भारत में यूथेनेशिया कानून समझें.
•सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से अधिक समय से लगातार वनस्पति अवस्था में रहे 32 वर्षीय हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी, जिससे जीवन समर्थन हटाने की अनुमति मिली.
•यूथेनेशिया पीड़ा कम करने के लिए किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त करने की प्रथा है; सक्रिय यूथेनेशिया में सीधा कार्य (जैसे घातक इंजेक्शन) शामिल है, जबकि पैसिव यूथेनेशिया जीवन-रक्षक उपचार को रोकना है.
•भारत में सक्रिय यूथेनेशिया अवैध है, इसे गैर इरादतन हत्या या हत्या माना जाता है; पैसिव यूथेनेशिया सख्त सुरक्षा उपायों के तहत अनुमत है.
•भारत की कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों से विकसित हुई: अरुणा शानबाग मामले (2011) ने पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी, और कॉमन कॉज बनाम भारत संघ (2018) ने अनुच्छेद 21 के तहत "लिविंग विल" को मान्यता दी.
•यह फैसला "मारने" और "प्राकृतिक मृत्यु की अनुमति देने" के बीच महत्वपूर्ण कानूनी अंतर को उजागर करता है, विशिष्ट मामलों में रोगी की गरिमा और गरिमा के साथ मरने के अधिकार पर जोर देता है.