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Moneycontrol08-01-2026, 17:15

श्वसन संबंधी दवाओं की बिक्री दिसंबर में खराब वायु गुणवत्ता और मौसमी कारकों के कारण बढ़ी.

  • दिसंबर 2025 में श्वसन संबंधी दवाओं की मात्रा दोगुनी हो गई, जो भारतीय फार्मास्युटिकल बाजार (IPM) से काफी आगे निकल गई.
  • खराब वायु गुणवत्ता, मौसमी कारकों और अस्थमा व COPD के लिए इनहेलर के बढ़ते उपयोग ने, खासकर उत्तरी और शहरी भारत में, इस वृद्धि को बढ़ावा दिया.
  • श्वसन संबंधी इकाई बिक्री IPM के 2.6% की तुलना में 5.2% बढ़ी, जो केवल मूल्य-आधारित वृद्धि के बजाय वास्तविक खपत को दर्शाती है.
  • 2025 में श्वसन खंड का कुल बाजार मूल्य 18,913 करोड़ रुपये था, जो कुल IPM का 8% है और इसमें 10% मूल्य वृद्धि दर्ज की गई.
  • Cipla, GSK, Glenmark, Lupin और Zydus जैसी इनहेलर-आधारित पोर्टफोलियो वाली कंपनियों को 2026 तक स्थायी राजस्व मिलने की उम्मीद है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: खराब वायु गुणवत्ता और पुरानी बीमारियों ने दिसंबर 2025 में श्वसन संबंधी दवाओं, विशेषकर इनहेलर की बिक्री में भारी वृद्धि की.

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