'राइट टू डिस्कनेक्ट' बिल: भारत के कार्यस्थलों के लिए यूरोपीय नियम की चुनौती.

यह कैसे काम करता है
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Storyboard•16-12-2025, 09:30
'राइट टू डिस्कनेक्ट' बिल: भारत के कार्यस्थलों के लिए यूरोपीय नियम की चुनौती.
- •लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने कर्मचारियों के लिए "डिस्कनेक्ट करने का अधिकार" विधेयक पेश किया है.
- •विधेयक का उद्देश्य कर्मचारियों को निर्धारित घंटों के बाहर काम से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक संचार से अलग होने का कानूनी अधिकार देना है, ताकि लगातार उपलब्धता की संस्कृति पर अंकुश लगाया जा सके.
- •विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक सफेदपोश कर्मचारियों के लिए परिवर्तनकारी हो सकता है, लेकिन उद्योग जगत के नेताओं को भारत की सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था और वैश्विक समय-क्षेत्रों के कारण इसके कार्यान्वयन में जटिलताएँ दिख रही हैं.
- •दुनिया के केवल 11 देशों में ऐसे कानून हैं, जिनमें से अधिकांश की उत्पादकता भारत से काफी अधिक है, जो इस कानून को लागू करने में भारत के लिए एक चुनौती हो सकती है.
- •उद्योग विशेषज्ञ एक कठोर राष्ट्रीय जनादेश के बजाय क्षेत्र-विशिष्ट मानदंडों और आंतरिक कंपनी नीतियों जैसे अधिक कैलिब्रेटेड दृष्टिकोण का सुझाव देते हैं, साथ ही मौजूदा श्रम संहिताओं के सुचारू रोलआउट पर जोर देते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: यह बिल कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है.
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