मोहन भागवत: 'हिंदू धर्म पूजा पद्धति नहीं, जीवन जीने का तरीका है'

भारत
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News18•25-01-2026, 05:08
मोहन भागवत: 'हिंदू धर्म पूजा पद्धति नहीं, जीवन जीने का तरीका है'
- •आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रांची, झारखंड में आदिवासी समुदायों को संबोधित करते हुए हिंदू धर्म को किसी एक अनुष्ठानिक प्रणाली के बजाय 'सामूहिक जीवन शैली' बताया.
- •उन्होंने कहा कि सरना धर्म, एक प्रकृति-पूजक परंपरा, हिंदू पहचान के समावेशी दायरे में एक विशिष्ट और सम्मानित 'पूजा का रूप' है.
- •भागवत ने भारतीय परंपरा के मूल में 'अनेकता में एकता' पर जोर दिया, यह दावा करते हुए कि आस्था के विभिन्न मार्ग वैध हैं और कोई भी स्वाभाविक रूप से गलत नहीं है.
- •संवाद में पेसा नियमों, अवैध भूमि हड़पने, नशीले पदार्थों के सेवन और एक अलग सरना धार्मिक संहिता की मांग सहित सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई.
- •भागवत ने आदिवासी समुदायों को 'जंगलों और भूमि के ट्रस्टी' बताया, इस बात पर जोर दिया कि उनकी सहमति और जवाबदेही के बिना कोई विकास नहीं होना चाहिए.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मोहन भागवत ने हिंदू धर्म को एक समावेशी जीवन शैली बताया, जिसमें आदिवासी आस्थाओं को एकीकृत किया गया और सामुदायिक चिंताओं को संबोधित किया गया.
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