मोहन भागवत: सैन्य शक्ति नहीं, नैतिक शक्ति से बदलेगी दुनिया; भारत की जिम्मेदारी

जयपुर
N
News18•23-01-2026, 03:51
मोहन भागवत: सैन्य शक्ति नहीं, नैतिक शक्ति से बदलेगी दुनिया; भारत की जिम्मेदारी
- •आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह दुनिया में धर्म और नैतिक मूल्यों का प्रसार करे, जो केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि अनुकरणीय आचरण से संभव है.
- •राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में 'मर्यादा महोत्सव' को संबोधित करते हुए भागवत ने जोर दिया कि वैश्विक संघर्ष और अस्थिरता को केवल प्रौद्योगिकी, पूंजी या सैन्य शक्ति से हल नहीं किया जा सकता.
- •उन्होंने बताया कि दुनिया को एक नैतिक ढांचे की आवश्यकता है, जो भारत के पास है, ताकि मानवीय व्यवहार को धर्म के दायरे में निर्देशित किया जा सके, क्योंकि लोग उपदेशों से नहीं, आचरण से प्रेरित होते हैं.
- •भागवत ने वैश्विक संकटों को अनियंत्रित विकास से उत्पन्न असंतुलन से जोड़ा और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और सद्भाव की भारतीय परंपरा की वकालत की.
- •उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि भारतीय दर्शन धन को एक साधन मानता है, साध्य नहीं, दान को बढ़ावा देता है और अस्तित्व की एकता में विश्वास करता है, जिससे संतुलित और मानवीय व्यवहार उत्पन्न होता है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मोहन भागवत का कहना है कि नैतिक शक्ति और अनुकरणीय आचरण वैश्विक परिवर्तन की कुंजी है, सैन्य शक्ति नहीं.
✦
More like this
Loading more articles...





