
विकास प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल, सड़कें, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर नक्सल विरोधी उपलब्धियों को बनाए रखता है।
सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में चरमपंथी विचारधाराओं का मुकाबला करने में एक चुनौती बनी हुई है, जिसे "शहरी नक्सलवाद" कहा जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस बात का कोई संकेत नहीं मिलता है कि नक्सली समूह भविष्य में फिर से संगठित होंगे।