सद्गुरु: 'शिव' का अर्थ है 'कुछ भी नहीं', अस्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति.

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News18•14-02-2026, 15:19
सद्गुरु: 'शिव' का अर्थ है 'कुछ भी नहीं', अस्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति.
- •सद्गुरु बताते हैं कि शिव 'कुछ भी नहीं' हैं, जो अस्तित्व की सबसे बड़ी शक्ति और हर चीज़ का आधार है.
- •यह अवधारणा महाशिवरात्रि के सार से मेल खाती है: आंतरिक शांति का अनुभव करने के लिए अंतर्मुखी होना.
- •योग दर्शन में, शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि अस्तित्व की एक अवस्था हैं, जो अव्यक्त आयाम का प्रतिनिधित्व करते हैं.
- •'कुछ भी नहीं' का अर्थ असीमित क्षमता है, वह नींव जिससे सृष्टि का उदय होता है.
- •महाशिवरात्रि आंतरिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करती है, शिव द्वारा प्रतीक असीम उपस्थिति से जुड़ना.
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