प्रदूषण, प्लास्टिक, हार्मोन: प्रजनन क्षमता के लिए एक अनदेखा खतरा.

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News18•09-02-2026, 12:55
प्रदूषण, प्लास्टिक, हार्मोन: प्रजनन क्षमता के लिए एक अनदेखा खतरा.
- •फर्टिलिटी क्लीनिक सामान्य चक्र और ओवेरियन रिजर्व वाली महिलाओं में खराब भ्रूण गुणवत्ता, इम्प्लांटेशन विफलता और प्रजनन क्षमता में तेजी से गिरावट देख रहे हैं.
- •डॉ. राधिका शेठ एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) के पर्यावरणीय संपर्क को हार्मोनल क्षरण में तेजी लाने वाला एक प्रमुख कारक बताती हैं, जो सेलुलर और रिसेप्टर स्तरों को प्रभावित करता है.
- •वायु प्रदूषण ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण बनता है, जिससे ओवेरियन फॉलिकल्स और शुक्राणु डीएनए प्रभावित होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप युवा रोगियों में आईवीएफ के खराब परिणाम मिलते हैं.
- •बिस्फेनोल और थैलेट जैसे प्लास्टिक रसायन एस्ट्रोजन की नकल करते हैं, प्रोजेस्टेरोन संवेदनशीलता को बाधित करते हैं, और खराब ल्यूटियल सपोर्ट तथा उच्च शुक्राणु डीएनए विखंडन में योगदान करते हैं.
- •पर्यावरणीय हार्मोनल व्यवधान नियमित निदान सीमा से नीचे काम करता है, जिससे प्रारंभिक पहचान मुश्किल हो जाती है, खासकर भारत जैसे उच्च प्रदूषण और विलंबित परिवार नियोजन वाले संदर्भों में.
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