भारतीय बाजार का विरोधाभास: मजबूत अर्थव्यवस्था, कमजोर प्रदर्शन – क्या है वजह?

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CNBC TV18•17-12-2025, 13:01
भारतीय बाजार का विरोधाभास: मजबूत अर्थव्यवस्था, कमजोर प्रदर्शन – क्या है वजह?
- •आईपीओ और हिस्सेदारी बिक्री से भारी इक्विटी आपूर्ति (₹5.5 लाख करोड़) मांग से अधिक है, जिससे एफपीआई ने $18 बिलियन की शुद्ध बिक्री की.
- •निवेशकों की "हार मान लेना" और भावनात्मक बिक्री, खासकर स्मॉल-कैप में, निराशा और रुपये के मूल्यह्रास से प्रेरित है.
- •मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बावजूद रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है, वैश्विक अनिश्चितता और यूएस-भारत व्यापार समझौते में देरी से भावनाएं प्रभावित हैं.
- •बाजार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और बढ़े हुए आईपीओ जैसे अत्यधिक मूल्यवान खंडों में आवश्यक "झाग हटाने" और सुधार का अनुभव कर रहा है.
- •मौजूदा संघर्षों के बावजूद, मजबूत अंतर्निहित आर्थिक बुनियादी सिद्धांत और बढ़ती आय के अनुमान 2026 तक बाजार के "रीसेट" और सुधार की ओर इशारा करते हैं.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भारतीय बाजार आपूर्ति, भावना और मुद्रा के कारण संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन मजबूत बुनियादी सिद्धांत 2026 तक सुधार का संकेत देते हैं.
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