प्राइवेट जेट: खरीदने से लेकर रखरखाव तक, जानें लागत और सरकारी नियम

मनी
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News18•28-01-2026, 19:14
प्राइवेट जेट: खरीदने से लेकर रखरखाव तक, जानें लागत और सरकारी नियम
- •प्राइवेट जेट विलासिता का प्रतीक हैं, जिनकी लागत हल्के जेट के लिए 15 करोड़ से लेकर बड़े जेट के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक तक होती है.
- •भारत में प्राइवेट जेट खरीदने के लिए DGCA के कड़े नियमों का पालन करना होता है, जिसमें गृह मंत्रालय से 'सुरक्षा मंजूरी' और RBI के विदेशी मुद्रा नियमों का अनुपालन शामिल है.
- •एक यात्रा की परिचालन लागत काफी अधिक होती है, जिसमें महंगा ईंधन (50,000-1 लाख प्रति घंटा), लैंडिंग/पार्किंग शुल्क और ग्राउंड हैंडलिंग शुल्क (50,000-1 लाख) शामिल हैं.
- •रखरखाव एक बड़ा खर्च है, जिसमें पायलटों और केबिन क्रू का वेतन, उच्च बीमा प्रीमियम और हैंगर का किराया (प्रति माह लाखों) शामिल है.
- •खरीदने के लिए विमान ब्रोकर या एविएशन मैनेजमेंट कंपनियों की मदद ली जाती है; चार्टर करना एक अधिक किफायती विकल्प है, जिसकी लागत 1.5 लाख से 8 लाख रुपये प्रति घंटा है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: प्राइवेट जेट का मालिक होना एक बड़ा निवेश है, जिसमें खरीद और रखरखाव की उच्च लागत तथा कड़े नियम शामिल हैं.
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