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News1830-01-2026, 22:00

खासी समुदाय: जहां दुल्हन नहीं, दूल्हा जाता है ससुराल! भारत की अनोखी मातृसत्तात्मक परंपरा

  • मेघालय के खासी समुदाय में शादी के बाद लड़कियां ससुराल नहीं जातीं, बल्कि दूल्हा दुल्हन के घर रहने आता है.
  • खासी समुदाय में बच्चों का उपनाम मां के नाम पर होता है, और संपत्ति का अधिकार बेटियों को मिलता है, जिसमें सबसे छोटी बेटी मुख्य वारिस होती है.
  • शादी के बाद पुरुष घर की जिम्मेदारियां संभालते हैं, जबकि महिलाएं बाहरी काम और व्यापार देखती हैं, पारंपरिक लिंग भूमिकाओं को उलटते हुए.
  • लड़की का जन्म सौभाग्य और उत्सव का क्षण माना जाता है; केवल बेटों वाले परिवार अपनी वंश परंपरा जारी रखने के लिए लड़की को गोद लेने को प्राथमिकता देते हैं.
  • यह मातृसत्तात्मक समाज कम अपराध दर और महिलाओं के लिए उच्च सम्मान का दावा करता है, जो भारत में एक अद्वितीय सामाजिक संरचना को दर्शाता है.

यह क्यों महत्वपूर्ण है?: मेघालय का खासी समुदाय एक अद्वितीय मातृसत्तात्मक प्रणाली का पालन करता है जहां दूल्हे ससुराल जाते हैं, बेटियां विरासत पाती हैं, और लड़कियों के जन्म का जश्न मनाया जाता है.

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