भरतपुर के किसान आंवले की खेती से हो रहे मालामाल, पारंपरिक फसलों को छोड़ा

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News18•04-02-2026, 09:05
भरतपुर के किसान आंवले की खेती से हो रहे मालामाल, पारंपरिक फसलों को छोड़ा
- •भरतपुर के भुसावर और छोकरवाड़ा क्षेत्रों के किसान पारंपरिक फसलों की जगह आंवले की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं.
- •यहां का आंवला अपने बड़े आकार, मोटाई और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, जिसकी अचार उद्योग में भारी मांग है.
- •अनुकूल मिट्टी और जलवायु, साथ ही प्राकृतिक स्वाद और औषधीय गुण, उच्च उपज और बाजार में मांग में योगदान करते हैं.
- •स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयां अब आंवले का अचार, चटनी, जैम और पापड़ बना रही हैं, जिनकी ग्रामीण और शहरी बाजारों में उच्च मांग है.
- •आंवले की खेती में कम लागत, आसान रखरखाव, लंबे समय तक उपज और स्थिर आय मिलती है, जिससे यह एक अत्यधिक लाभदायक व्यवसाय बन गया है.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?: भरतपुर में आंवले की खेती किसानों को उच्च मांग, कम लागत और स्थिर आय के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है.
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