फैक्ट्री में नौकरी नहीं मिली तो बांस के बर्तनों से बनाई पहचान, भैया लाल बंसल की कहानी.

सीधी
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News18•16-02-2026, 14:39
फैक्ट्री में नौकरी नहीं मिली तो बांस के बर्तनों से बनाई पहचान, भैया लाल बंसल की कहानी.
- •सीधी के भैया लाल बंसल ने अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री में नौकरी न मिलने पर पैतृक बांस शिल्प को अपनाया.
- •उनका परिवार अब 'दौरा', 'सुपा' और 'डलिया' जैसे पारंपरिक बांस के बर्तन बनाने में माहिर है, जो शादी और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आवश्यक हैं.
- •बांस के उत्पाद अपनी प्राकृतिक शुद्धता के लिए मूल्यवान हैं और छठ पूजा जैसे त्योहारों के दौरान इनकी उच्च मांग होती है.
- •परिवार हर महीने 10,000 से 15,000 रुपये कमाता है, जिसमें परिवार का हर सदस्य शिल्प में योगदान देता है.
- •आधुनिक युग में मांग कम होने के बावजूद, बांस के बर्तन ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और व्यावसायिक उपयोग के लिए लोकप्रिय बने हुए हैं.
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